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Sunday, May 06, 2012

Musings..





हसरतों  की  कब्र  में , एक  रूह  दफन  हो  गयी ..
वोह  आग  को  लगा  गले , एक  आह  ओढ़े  सो  गयी ...
आंसुओं  से  आसमान  के , धुल  गयी  ज़मीन  तेरी ..
कि बादलों की  साजिशों  में , घुल  गयी  ज़मीन  तेरी ...

किस  फ़कीर  कि  मज़ार  पे , अब  चादरें  चधाऊँ  मैं ?
किस  शौख के  बाज़ार  में , दिलचस्पियाँ  जताऊँ  मैं ?
पुछा  जो  कल  कि रात  से , वोह  बोली  क्या  बताऊँ  मैं ?
क्यूँ  इस  सवेरे  के  आगे , फिर  आज  सर  झुकाऊँ  मैं ?

क्यूँ  आज  जलती  लौ  से  लड़  पड़ी  हैं  यह  हवाएं  फिर ?
क्यूँ  अब  दुआ   की  राह  देखती  हैं  यह  दवाएं  फिर ?
 भूले  हुए  गुनाहों  की , क्यूँ  मिल  रहीं  सजाएं  फिर ?
क्यूँ  हंस  रहीं  हैं  आज  रेगिस्तान  की  फिज़ाएं फिर ?

एक  आस  मेरी  थी  कभी , तनहाइयों  में  खो  गयी ,
एक  सांस  मेरी  थी  कभी , गवाहियों  में  खो  गयी ,
एक  रात  कि जो  बात  थी , कहानियों  में  खो  गयी ,
एक  अक्स  है , छुपाने  को , परछाइयों में  खो  गयी .